तुम कभी शिकायत नहीं करते जब मैं तुम्हे इतना गन्दा रखता हूँ तुम पे कितनी ही किताबों,अखबारों ,पन्नो ,कपड़ो का भार लाद देता हूँ बेल्ट से लेकर कंघा , चार्जर सब तुम्हारे ऊपर कहीं न कहीं पड़े ही रहते है |
लगता है घर में सिर्फ मम्मी ही तुम्हारी शुभचिंतक हैं तभी तो हमेशा आके डांटती है तुम्हारे लिए कि साफ़ करो , कुत्ता भी कहीं बैठता है तो अपनी जगह साफ़ करके टाइप सरकासम मारती हैं और लाख बार मेरे न सुनने के बाद वो आके तुम्हे झाड़ के नयी चद्दर बिछा के साफ़ कर देती हैं ,
और मैं वापस से पहले जैसा कर देता हूँ , फिर भी तुम कभी शिकायत नहीं करते , बल्कि एक आराम का एहसास और सुकून भरी नींद देते हो |
पिछले लगभग १५ सालों से तुम मेरे साथ हो , मेरे ख़ुशी के पलों , दुःख की घडी , हर पल संभाला है , शायद ही तुम्हारे अलावा इतने करीब से , आहिस्ता आहिस्ता मुझे एक शरारती बच्चे से आज बड़े होने तक का सफर देखा है , चाहे बचपन में की गयी तकियों की लड़ाई , तुम पर कूदना , अपने ख़याली दुनिया में खोना , ज़िद्द करना , रोना हसना सब और आज बड़े होने पर भी अपने विचारों की समुन्दर में खोना, उलझन ,अवसाद में तुम्हारे कोने पे लेटे रहना , बड़बड़ाना , राजाओं की तरह टेकानी लगा के लैपटॉप पे फिल्म देखना या कुछ काम करना और मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहना |
मगर तुम्हारा ख्याल कभी मेरे दिमाग में आया ही नहीं , आखिर बार तुम पर तब ध्यान दिया गया था जब तुम्हारा एक पावा टूट गया था , और बढ़ई को बुलाना पड़ा था और उसने आके तुम्हे वापस से खड़ा कर दिया था।
तुम्हे याद है न पहले तुम पर वो रुई वाला एक मोटा गद्दा पड़ा रहता था , और वो तुम्हारे साथ कितने सालों से था मगर मेरे ज्यादा आराम के कारण वो गद्दा जो तुम्हारे साथ इतने साल से था अलग कर दिया गया और उसकी जगह लेली स्लीपवेल की आरामदेह मैट्रेस ने , तुम्हे कैसा लगा होगा उससे अलग होके ये शायद एक प्रेमी ही समझ सकता है जो अपनी प्रेमिका से अपने घर वालों के कारण बिछड़ गया |
जिंदगी भी इसी तरह होती है हम कुछ लोगों की बिना परवाह किये उन्हें फॉर ग्रांटेड ले लेते हैं , और वो हमे आराम पहुंचाने के लिए हर एक चीज़ करते हैं और एक दिन ख़ुद टूट के बिखर जाते हैं |
Nice
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