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Tuesday, July 19, 2022

शिंजो आबे की हत्या के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की जीत

शिंजो आबे की हत्या के बाद सत्तारूढ़ पार्टी की जीत 


हाल के चुनाव के कैंपेन के दौरान एक सभा में पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की गोली मार कर निर्ममता से हत्या की गयी ।  जिस घटना ने संपूर्ण दुनिया को हिला कर रख दिया था।  भारत के प्रधानमंत्री मोदी  ने शिंजोआबे की मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट करते हुए एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की थी ।  इससे भारत और जापान के मैत्री रिश्तों की घनिष्टता जाहिर होती है।  

जापान में  इस सप्ताह संपन्न हुए उच्च सदन के चुनाव में लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी व् उसके सहयोगी दल ने बहुमत प्राप्त करते हुए जीत हासिल की। प्रधानमंत्री फूमिया किशिदा अब 2025 तक जापान के प्रधानमंत्री बने रहेंगे। उच्च सदन के चुनाव परिणाम में एलडीपी पर प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा की पकड़ मजबूत होगी। मुद्रास्फीति से लेकर परमाणु ऊर्जा और रक्षा तक मुख्य नीतिगत मुद्दों को किशिदा अपने अनुसार लागू कर सकेंगे।  जापान में भी द्विसदनीय संसदीय व्यवस्था है जिसमे एक उच्च सदन व एक निम्न सदन लोक सदन। शिंजो आबे के प्रधानमंत्री पद त्याग करने के बाद 2021 के संसदीय चुनाव में आबे का जादू कायम रहा था  और सत्तारूढ़ दाल एलडीपी व न्यू कोमितो के गठजोड़ को 480 में से 325 सीट मिली वहीँ मुख्य विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी को 57 सीट ही प्राप्त हुईं। 


इस साल 2022 में उच्च सदन के चुनाव में भी एलडीपी के लिए पूर्व प्रधानमंत्री ने जनसभाएं की मगर सरकार की नीतियों के विरोधी एक युवक ने गोली मार कर उनकी हत्या कर दी। इससे पूरे देश में शोक की लहर व् लोगों में गुस्से की भावना बढ़ गई। किशिदा ने इस हमले को बर्बर करार दिया।10 जुलाई को संपन्न हुए चुनाव के  परिणाम आने पर उन्होंने ऐसे समय में ख़ुशी जाहिर न करके इसे लोकतंत्र के लिए जरुरी बताया। और पार्टी के गंभीर व सर्वोच्च नेता के तौर पर नज़र आये।  



भारत-जापान के मैत्रीपूर्ण रिश्तों का नया आयाम




भारत की दृष्टि से शिंजो आबे की मृत्यु के साथ दोस्ती जो निरंतर मजबूत हो रही थी को गहरा आघात पहुंचा है।  शिंजो आबे के कार्यकाल से पहले भारत और जापान यूँ तो सहयोगी देश थे मगर कुछ समय जैसे भारत के परमाणु परिक्षण के समय जापान द्वारा तीख़ी प्रतिक्रिया दर्ज़ की गई थी। 


भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना अप्रैल 1952 में हुई थी।  इस द्विपक्षीय संबंधों को 70 वर्ष पूरे हो चुके हैं।  मगर आज भारत और जापान के रिश्ते इन 70 सालों में सबसे ज्यादा मज़बूत हैं। जापान भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक , राजनितिक , सैन्य साझीदार है।  इन संबंधों में सबसे बड़ी भूमिका पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की है। 2007 में पहली बार भारत दौरे पर आये पूर्व प्रधानमंत्री ने देश की संसद को सम्बोधित कर भारत और जापान के संबंधों को नए आयाम देने की शुरुआत की।  


2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने  के बाद भारत और जापान के बीच सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी से लेकर समुद्री सुरक्षा , एक्ट ईस्ट पालिसी , बुलेट ट्रैन , इकनोमिक कॉरिडोर , और इंडो पैसिफिक पर साझेदारी हुई।  

डोकलाम के मुद्दे पर उन्होंने भारत का पक्ष लिया और खुलकर चीन की विस्तारवादी नीतियों की आलोचना की। 

2017 में चीन की नीतियों व इंडो पैसिफिक में उसका दबदबा काम करने की लिए आबे ने क़्वाड की नींव रखी।  जिसमे भारत , अमेरिका , जापान व ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।  यह इन देशों के बीच व्यापारिक व एक अहम सैन्य समझौता है।  


यह साझेदारी 2020 में शिंजो आबे के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद भी जारी है।  मार्च 2022 में जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा दो दिवसीय भारत दौरे पर आये थे।  तब दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने दोनों देशों के बीच आर्थिक , सामरिक और राजनितिक संबंधों को और मज़बूत बनाने के साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की।  


जापान के प्रधानमंत्री ने अगले पांच वर्षों में भारत में 42 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की थी। जापान के साथ भारत का कुल व्यापार २०२०-२१ में 15. 3 बिलियन डॉलर पहुंच गया। किशिदा ने निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में विनिर्माण , जलवायु परिवर्तन , इलेक्ट्रिक व्हीकल और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया। 


24 मई को हुई क्वाड समिट 2022 में जब जापान के प्रधानमंत्री किशिदा से रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत के रुख को लेकर सवाल किया गया उन्होंने कहा ऐसी अंतर्राष्ट्रीय स्थिति में हर देश की अपनी ऐतिहासिक एवं भौगोलिक स्थिति होती है। सामान विचारधारा के बीच भी स्थिति पूरी तरह सहमत नहीं हो सकती है। उन्होंने भारत के तटस्थ रुख की सराहना भी की।


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