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Saturday, June 4, 2022

बुलडोज़र की राजनीति

 मई २०२२ 

हमारी यादें बुलडोज़र के साथ बहुत गहरी है , भारत में बेरोज़गार लोगों के लिए एक मनोरंजन व  वक्त जाया करने का साधन है , कहीं भी JCB  मशीन कुछ बना रही है कुछ गिरा  रही है  इसे देखने ही एक भारी मज़मा लग जाता है 

हम भारतीयों  की आदत ही कुछ ऐसी है ,  यहाँ  २-३ लोग भी कुछ देखने को रुकते हैं तो देखा देखी  में पूरा मोहल्ला पहुंच जाता है  , यहाँ एक चीज़ की बहुतायत  है “समय “ तभी तो लोग अपना कीमती काम छोड़ कर भीड़ में शामिल होते हैं , चाहे कहीं  गड्ढा खुद रहा हो , या कोई दीवार , इमारत  गिरायी जा रही  हो इत्यादि। 

आज कल ये  JCB  मशीन उर्फ़ बुलडोज़र फिर चर्चा का विषय बना हुआ है अब भी इसे देखने के लिए भारी मज़मा लग रहा है मगर उसके आस पास खड़े लोगों की आँखों में आंसू हैं , वो सहमे हैं ,उन्हें समझ नहीं आ रहा उनकी क्या  गलती है जो बरसों  से ईंट -ईंट  जोड़ कर बनाया उनका छोटा सा आशियाना एक दिन ढहा  दिया  जा रहा है |


 कानून तो भारत में खैर अँधा हैं यहाँ का सिस्टम है, जिसकी लाठी उसकी भैंस तो लाठी सरकार के हाथ में है , और फ़िलहाल सरकार बुलडोज़र को लाठी बनाये हुए है, सरकारी तंत्र में बैठे लोगों को इससे परहेज़ नहीं है उल्टा उन्हें तो ये कुछ नारे भा गए हैं जैसे बाबा का बुलडोज़र हो या मामा  का बुलडोज़र।

 कुछ उन्मादी लोगों  को यह कृत्य भा रहा है उन्हें इस सरकार के अवैध अतिक्रमण तोड़ो अभियान में विशेष रूचि है क्योंकि उनके मतलब इससे सध रहे हैं। 

आज कल फिर नया चलन इस देश में चल पड़ा है धार्मिक नारों के सहारे अराजकता फैलाना , लोगों को चिन्हित कर मार पीट का  और पथरबाज़ी का , एक को सरकार  का आश्रय प्राप्त है वहीं दूसरा वर्ग उनकी आँखों में खटकता है कुछ समय पहले  देश में कई जगहों पर हुई राम नवमी और हनुमान जयन्ती पर हिंसा,संपत्ति को नुकसान और दंगों से से शुरू ये बुलडोज़र की राजनीति अपने ज़ोरो पर है 

कायदे से तो ये होना चाहिए था , कि  पुलिस दंगो को नियंत्रित करे , दोषियों को गिरफ्तार करे और कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर उचित दंड दिलाए , यदि किसी ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है , और वह कोर्ट में साबित हो जाता है तो अपराधी से वसूली की उचित प्रक्रिया मौजूद है | शायद भारतीय न्यायपालिका की कार्यवाही लचर है और काफी समय लेती है तभी तो सरकार को ये काम अपने हाथों में लेना पड़ रहा है 

 गलती किसकी है उन लोगों की जो सालों से अतिक्रमण करे बैठे हैं और सरकारी कार्यवाही में पीड़ित नज़र आ रहे  मगर सरकार द्वारा किसी विशेष कारण चिन्हित किये जा रहे या वे जो इस कार्यवाही से खुश हो रहे। 

ये दिशाहीन, उन्मादी  लोग जो सरकार की इस त्वरित कार्यवाही से खुश हो रहे , उन्हें घरों को उजड़ता देख एक सुकून की अनुभूति हो रही, लेकिन जंगल में सूखे पेड़ों से शुरू हुई आग पहले हरे पेड़ों को भी और फिर धीरे धीरे पूरे जंगल को जला कर राख़ कर देती है |


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